आपका बैंक लोन के साथ बीमा खरीदने का दबाव तो नहीं बना रहा?, आरबीआई का यह अपडेट जान लीजिए, मिल सकता है हर्जाना

 

 

क्या आप भी बैंकों के लगातार आने वाले अनचाहे कॉल्स या लोन लेते समय जबरन चिपकाए गए बीमा उत्पादों से परेशान हैं? अगर हां, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आपके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों में ‘मिस-सेलिंग’ (गलत तरीके से उत्पाद बेचना) की संस्कृति को खत्म करने के लिए बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

 

आरबीआई ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री के लिए नए मसौदा निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ प्रस्ताव दिया गया है कि बैंकों को ऐसी किसी भी प्रोत्साहन संरचना से बचना चाहिए, जो कर्मचारियों को ग्राहकों को गलत उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करती हो।

इंसेंटिव और ‘पुश’ सेल पर लगेगा पूर्ण विराम
नए ड्राफ्ट में आरबीआई ने बैंकों के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी नीतियां और प्रथाएं न तो मिस-सेलिंग के लिए प्रोत्साहन पैदा करें और न ही कर्मचारियों या डायरेक्ट सेल्स एजेंटों (डीएसए) को उत्पादों की बिक्री को ‘पुश’ करने के लिए प्रोत्साहित करें।

अक्सर देखा जाता है कि बैंक कर्मचारियों के बीच ज्यादा प्रोडक्ट बेचने की होड़ लगी होती है। आरबीआई ने इस पर नकेल कसते हुए कहा है कि बिजनेस यूनिट्स के बीच बिक्री के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करना या ‘टार्गेटेड सेलिंग’ के लिए विशिष्ट दिन तय करना जैसी प्रथाएं बंद होनी चाहिए। इसके अलावा, ड्राफ्ट में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स (जैसे म्यूचुअल फंड या बीमा) बेचने वाले कर्मचारियों को उस तीसरी पार्टी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई इंसेंटिव नहीं मिलना चाहिए।

अब नहीं चलेगी ‘लोन के साथ बीमा’ जैसी बंडलिंग
ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायत ‘बंडलिंग’ को लेकर होती है, जहां बैंक लोन के साथ जबरदस्ती कोई अन्य प्रोडक्ट बेच देते हैं। आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, बैंकों को किसी भी थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट या सर्विस को अपने खुद के प्रोडक्ट के साथ बंडल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने जोर देकर कहा है कि ग्राहक को विभिन्न कंपनियों के विकल्पों में से अपनी पसंद का प्रोडक्ट चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

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गलती साबित हुई तो पूरा पैसा होगा वापस
इस ड्राफ्ट का सबसे कड़ा पहलू जवाबदेही तय करना है। आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि जिन मामलों में मिस-सेलिंग साबित हो जाएगी, वहां बैंकों को उत्पाद या सेवा की खरीद के लिए ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि वापस करनी होगी। इतना ही नहीं, बैंक को एक स्वीकृत पॉलिसी के तहत मिस-सेलिंग के कारण हुए किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक को हर्जाना भी देना होगा।

कॉल करने के समय और ‘डार्क पैटर्न’ पर सख्ती
डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों को भ्रमित करने वाली तकनीकों पर भी आरबीआई की नजर है:

 

  • सहमति जरूरी: बैंक ग्राहकों को कॉल तभी कर सकेंगे जब उन्होंने इसकी सहमति दी हो।
  • समय सीमा: प्रमोशनल कॉल्स केवल ऑफिस के कामकाज के घंटों के दौरान ही किए जा सकेंगे।
  • डार्क पैटर्न: आरबीआई ने बैंकों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके यूजर इंटरफेस (ऐप या वेबसाइट) में किसी भी तरह के ‘डार्क पैटर्न’ का इस्तेमाल न हो। ड्राफ्ट में ऐसे लगभग एक दर्जन मामलों को सूचीबद्ध किया गया है जिनसे बैंकों को बचना चाहिए।

आम लोगों से 4 मार्च तक मांगी गई राय
उल्लेखनीय है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही इस तरह के विनियमों को लाने के व्यापक इरादे की घोषणा की थी, जिसके बाद यह ड्राफ्ट जारी किया गया है। आम जनता और हितधारकों को इस मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 4 मार्च तक का समय दिया गया है।

आरबीआई का यह कदम बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो ग्राहकों को न केवल अनचाहे उत्पादों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बैंकों की जवाबदेही भी तय होगी। अब गेंद बैंकों के पाले में है कि वे अपनी कार्यप्रणाली को कैसे सुधारते हैं।

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