दो दिन पहले तक जिन चेहरों पर न पछतावे की झलक थी और न ही कानून का खौफ, सोमवार को अदालत का फैसला आते ही वह मुरझा गए। कोर्ट परिसर में सभी दोषियों के पैर लड़खड़ा रहे थे। हाईवे कांड में दोषी करार दिए गए जुबैर व साजिद का फेमस होने का खुमार उस वक्त उतर गया, जब न्यायालय ने मरते दम तक कारागार में रहने की सजा सुनाई।
फैसला सुनते ही दोनों के तेवर पूरी तरह बदल गए। जेल वैन से कोर्ट रूम और फिर वापस ले जाते समय जुबैर और साजिद बार-बार चिल्लाते रहे कि वे निर्दोष हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। इस बीच हैरानी की बात यह रही कि जहां ये दोनों लगातार शोर मचाकर खुद को पाक-साफ बता रहे थे, वहीं इनके साथ मौजूद अन्य तीन दोषी पूरा वक्त खामोश रहे।
शनिवार को दिखाया था फेमस कर दो वाला तेवर
बोले- अगर दोषी हैं तो डीएनए टेस्ट क्यों नहीं कराया
विज्ञान और जांच प्रक्रिया का हवाला देकर वे सहानुभूति बटोरने की कोशिश करते रहे। साजिद ने यह भी दावा किया कि इस मुकदमे के चलते उसके एक भाई की मौत हो चुकी है। दोनों ने हाईकोर्ट में अपील करने की बात भी कही। हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि सजा का निर्धारण साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होता है। इनकी विस्तृत जांच अदालत पहले ही कर चुकी है।
तीन दोषियों की खामोशी बनी चर्चा का विषय
हाईवे कांड: 127 पन्नों के फैसले में न्याय का हथौड़ा, दोषियों को कड़ा सबक
बहुचर्चित हाईवे कांड में न्यायालय ने 127 पन्नों के फैसले में न केवल वारदात की बर्बरता को रेखांकित किया, बल्कि जांच में रही खामियों और साक्ष्यों की कड़ियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। न्यायाधीश ने आदेश में स्पष्ट किया कि समाज में भय व्याप्त करने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी की कोई जगह नहीं है। फैसले में पन्ना दर पन्ना अदालत ने चश्मदीदों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट का बारीकी से विश्लेषण किया है। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर चलते बेगुनाह नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस मामले में कानून के शासन को चुनौती दी गई थी।
हाईवे कांड : पांचों दोषियों को आजीवन कारावास, अंतिम सांस तक रहेंगे जेल में
बुलंदशहर में नेशनल हाईवे-91 पर नौ साल पहले कार सवार परिवार को बंधक बनाकर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म व लूटपाट करने के पांच दोषियों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओपी वर्मा के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
न्यायालय ने कहा कि सभी दोषी अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे। साथ ही अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित मां-बेटी को दी जाएगी। वारदात के नौ वर्ष चार माह और 25 दिन बाद फैसला आया है। वारदात 28 जुलाई 2016 की रात हुई थी। उस वक्त गाजियाबाद में रहने वाले परिवार (अभी बरेली निवासी) के छह सदस्य शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे। बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के निकट बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया था।
उन्होंने कार सवार 14 वर्षीय किशोरी, उसकी मां, पिता, ताई, ताऊ व तहेरे भाई को बंधक बना लिया था। सभी को कार समेत सड़क के दूसरी तरफ खेत में ले गए। वहां तीनों पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए। किशोरी व उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी लूटपाट कर भाग निकले थे।
मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की और छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बावरिया गिरोह के जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज, सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी और साजिद निवासीगण गांव इटखारी बिनौरा, तिरवा, कन्नौज के खिलाफ सीबीआई ने अप्रैल 2017 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
बाद में हरियाणा पुलिस ने धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेंद्र, नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल निवासी गांव गेशनपुर, मोहम्मदाबाद, फर्रूखाबाद और सुनील उर्फ सागर निवासी गांव बानवोई, आजादनगर, मोहम्मदाबाद को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ सीबीआई ने 27 जुलाई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था।
एक अभियुक्त सलीम की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। अन्य अभियुक्तों जुबैर, साजिद, धर्मवीर, नरेश व सुनील को गत शनिवार को न्यायालय ने दोषी करार दिया था। सोमवार को इनको सजा सुनाई गई। प्रकरण में लापरवाही करने के चलते एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी।







