थराली : पहाड़ में होली और होलियारों के रंगों की धूम।

होली और इसके सप्तरंगों की धूम आज पूरे हिंदुस्तान की गली-कूचों और गांव-शहरों से रंगों में सराबोर होकर विदेशों में भी जोश-वो-खरोश से मनाया जा रहा है। हिंदुस्तान की दीपावली और होली एक ऐसा त्यौहार है जिसका दुनियां इस्तकबाल करती है और भारत के इन दोनों त्यौहारों के बहु आयामी प्रतीकों का अनुसरण कर दुनियां के अच्छे लोग एक-दूसरे से जुड़ने का प्रयत्न भी करते हैं और ऐसा दुनियां के लोग करें भी क्यों नहीं ?? आखिरकार हिंदुस्तान के यह दोनों पर्व दुनियां को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं और समाज में शांति व सदभाव को मजबूती से स्थापित करने की राह दिखाते हैं,आज के दौर में जहां दुनियाभर में एक दूसरे से टकराहट की हर समय प्रबल संभावनाएं बनी रहती है तो ऐसे में भारतवर्ष के यह दोनों त्यौहार बहुत कुछ सिखाते हैं मानवता को परिवार की तरह बांधे रखने के लिए। यही कारण है कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रंगोत्सव होली का त्यौहार भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि आज दुनिया के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाने लगा है।

अब बात करते हैं उत्तराखंड और इसके पहाड़ों के गांवों में होली के बारे में।होली की हर टीम को यहां होलियार कहते हैं।पहाड़ों में होली की पारंपरिक रीति-रिवाज बहुत ही समृद्ध है। यहां होली के त्यौहार को पूरे एक पखवाड़े तक मनाया जाता है,प्रथम दौर में बैठकी होली का आयोजन किया जाता है और उसके बाद खड़ी होली यानी होली की टीमें गांव-गांव व घर-घर जाकर होली के गीतों को गाते हुए एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं, इसके एवज में हर घर से होलियारों को घर के बने विभिन्न पहाड़ी पकवानों,मिठाइयां, रूपए-पैसे भेंट स्वरूप दिए जाने की परंपरा है और यही एक-दूसरे को आपस में जोड़ने का काम करती आई है।आज भी यह बदस्तूर जारी है।

और पढ़े  श्रीनगर: तरुली गांव में घास लेने जंगल गई महिला को गुलदार ने मार डाला, महिलाओं के शोर मचाने पर भागा

बहरहाल हम आपको बताना और दिखाना चाह रहे हैं कि किस शानदार तरीके से पहाड़ की होली और होलियारों ने गांव गांव और घर घर जाकर सबको होली मनाई।
बाइट—

  • Related Posts

    नैनीताल: पोषण की कम़ी से नहीं बढ़ रही नौनिहालों की लंबाई, आंगनबाड़ी के बच्चों की लंबाई-वजन पर चिंता

    नैनीताल जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों के शारीरिक विकास के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। अगस्त की पोषण ट्रैकर रिपोर्ट के मुताबिक, पांच वर्ष तक के 44,224 बच्चों की…

    चमोली: हेमकुंड साहिब के बाद शीतकाल के लिए बंद हुए लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट, हुई बर्फबारी

    हेमकुंड साहिब के बाद आज नवरात्रि के पावन अवसर पर लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी शीतकाली के लिए बंद हो गए हैं। सुबह 7.15 मिनट पर मंदिर के कपाट विधि विधान के साथ…