गैरसैंण/चमोली : सरकार के घर घर सड़क सुविधा पहुंचाने के दावे हवा हवाई। ग्रामीण बीमार लोगों को कुर्सी पर लादकर अस्पताल ले जाने के लिए हैं मजबूर।

भले ही प्रदेश सरकार गांव गांव सड़़क पहुचाने के बड़े बड़े वायदे जरूर करती हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आज भी सड़क सुविधा न होने से लोगो को बीमार व्यक्तियों को कई-कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ता है। ताजा मामला गैरसैंण ब्लॉक के ग्राम सभा केडा के पंडवा गांव का है। बताते चलें कि गैरसैंण उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी है और यह गांव भी उसी के करीब है। तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि राजधानी क्षेत्र के बहुत से गांव आज भी एक अदद सड़क मार्ग के लिए जूझ रहे हैं।

सड़क की सुविधाओं से बन्चित पांडवा गांव की एक महिला के दोपहर में पेट दर्द होने पर महिला को कुर्सी के सहारे बांधकर कंधे में 7 किमी सड़़क तक ले जाना पड़ा। जहां से महिला को रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल ले जाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 15 दिन के अंदर यह 10 वां मामला है जब बीमार को यूं कुर्सी के सहारे अस्पताल ले जाना पड़़ रहा है। आपको बता दें कि खेत गधेरा से केडा और पांड़ाव गांवों के लिए पूर्व में 7 किमी की सर्वे पूरी हो चुकी है। लेकिन अभी तक सड़़क का काम शुरू नही हो पाया है। ऐसे में दोनों गांव के 100 परिवार आज भी सड़़क का सपना देख रहे है।

ग्रामीणो का कहना है कि सरकार घर घर सड़़क पहुंचाने की बात तो जरूर करती है लेकीन वो सिर्फ हवा हवाई साबित होती है।

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