उत्तर प्रदेश : अयोध्या में सुबह डेढ़ घंटे तक बंद रहा हनुमानगढ़ी का मेन गेट, प्रसाद चढ़ाने को लेकर हुआ था विवाद।

बजरंगबली की प्रधान पीठ हनुमानगढ़ी का मुख्य द्वार सुबह 9:00 बजे से लेकर 10:30 बजे तक बंद कर दिया गया। विवाद की शुरुआत तब हुई जब हनुमानगढ़ी के मुख्य महंत गद्दी नशीन प्रेमदास ने बुधवार को प्रसाद चढ़ाए जाने के इजाजत दी। कोरोना संकट को देखते हुए राम नगरी के जिन मंदिरों में प्रसाद चढ़ाए जाने पर पाबंदी लगाई गई थी उनमें से हनुमानगढ़ी भी एक था । प्रसाद चढ़ाए जाने पर पाबंदी 21 अप्रैल से ही शुरू हुई थी
हनुमानगढ़ी के मुख्य महंत ने प्रशासन के प्रतिनिधियों से सहमत के बाद बुधवार को प्रसाद चढ़ाने की अनुमति दी। इस अनुमति के अनुरूप हनुमानगढ़ी में प्रसाद के रूप में जो लड्डू ले जाएं गए उनकी क्वालिटी घटिया होने की शिकायत पर पुजारियों ने हनुमान जी के लिए यह प्रसाद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद हनुमानगढ़ी से बाहर आए साधुओं के जत्थे ने व्यापारियों से यह लड्डू ना बेचने और उसे फेंक देने का आह्वान किया। प्रसाद विक्रेताओं ने हीला हवाली की तो कुछ आक्रोशित नागा साधु ने कुछ दुकानों से लड्डू बाहर निकाल कर सड़क पर फेंक दिया। इस गतिरोध के बीच 10:30 बजते बजते हनुमानगढ़ी का मुख्य द्वार तो खुल गया किंतु हनुमानगढ़ी के इर्द-गिर्द प्रसाद की 100 के करीब दुकानों के शटर गिर गए। व्यापारियों ने इसे साधुओं की तानाशाही करार दी और नारेबाजी करते हुए प्रसाद फेंकने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत मणिराम दास का कहना है कि निश्चित रूप से हनुमान जी को प्रसाद के रूप में जो लड्डू बेचा गया वह बहुत खराब गुणवत्ता वाला था और इसे नहीं बर्दाश्त किया जा सकता। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर जिलाधिकारी अनुज कुमार झा कई शीर्ष पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पहुंचे। इस बीच दूरदराज  से आने वाले श्रद्धालुओं में अफरा तफरी का माहौल रहा।

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