उत्तराखंड सीएम आवास : 6 दिन – 9 ब्राह्मण, बस दूर हो गया मुख्यमंत्री आवास का वास्तु दोष, फिर हुआ यह शुभ काम, पढ़ें क्या है मामला…

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूजा-अर्चना के बाद आखिरकार सीएम आवास में गृह प्रवेश कर ही लिया। इससे पहले नौ ब्राह्मणों ने छह दिन तक पूजा-अर्चना और यज्ञ पाठ किया। ज्योतिषियों और वास्तु शास्त्रियों के सुझावों पर वास्तु के अनुसार भवन में बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई है।

वहीं, कुछ हिस्सों में अभी भी मरम्मत का काम चल रहा है। वास्तु के अनुसार आवास की खिड़कियों, कमरों, बैठक, भोजनालय, चूल्हे, पानी की स्थिति में बदलाव किया गया है। वहीं, अभी भी कई कोणों को बदलने का काम जारी है। 

सोमवार को आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी ने पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके परिवार को गृह प्रवेश करवाया। मुख्यमंत्री आवास को लेकर यह धारणा है कि जो भी मुख्यमंत्री यहां रहा, वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। सबसे पहले यहां रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की असमय विदाई हुई। विजय बहुगुणा को भी आधे में अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। बंगले को लेकर धारणा इतनी गहरी है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने पूरे कार्यकाल में वहां रहने का साहस नहीं जुटा सके। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत करीब चार साल के अपने कार्यकाल में उसी आवास में रहे, वो भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उनके बाद मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत उस आवास से दूर ही रहे। हालांकि उसके बावजूद उनकी असमय विदाई हो गई। अब पुष्कर सिंह धामी ने उस आवास में रहने की हिम्मत तो दिखाई है, लेकिन उससे पहले कई दिनों तक तमाम वास्तु दोषों को दूर किया गया है। आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी ने बताया कि 21 से 26 जुलाई तक नौ ब्राह्मणों ने आवास में विधिवत वास्तु स्थापना, वास्तु पूजन, देवी देवताओं का आह्वान, महाविद्या, रुद्री, गायत्री, चंडी, दुर्गा सप्तशती का पाठ कर स्थान को जागृत और सिद्ध किया। इसके अलावा वास्तु के अनुसार भवन में बड़े पैमाने पर बदलाव भी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बेडरूम की खिड़कियां दक्षिण दिशा में खुल रही थीं, जिन्हें बंद कर दिया गया है।
उनकी जगह पर वुड की वॉल पेनलिंग की गई है। अब खिड़कियां केवल नॉर्थ ईस्ट में हैं। इसके अलावा दक्षिण दिशा में बने किचन का वास्तुदोष भी दूर किया गया है। चूल्हे को आग्नेय कोण और जल को उत्तर दिशा में रखा जा रहा है। वास्तु के अनुसार आग और पानी एक साथ नहीं होने चाहिए। जिस घर में ऐसा होता है, वहां ऊर्जा समाप्त होने लगती है। इसके अलावा मुख्यद्वार और उससे लगी खिड़कियों की स्थिति को भी बदला गया है, अब वह सभी उत्तर-पूर्व की ओर खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भवन के पिछले दक्षिण में आंगन झुका हुआ है, जो वास्तु के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। यह दोष भवन में रहने वालों को भय और अस्थिरता प्रदान करता है। इसलिए उस हिस्से में मिट्टी भरकर उसे उठाया जा रहा है। उसके बाद आंगन को समतल किया जाएगा। समस्त दोषों के निराकरण के लिए छह दिनों तक चले विशेष मंत्रोच्चारण और यज्ञ में सीएम ने पूर्णाहूति दी। सोमवार को मुख्यमंत्री धामी ने मांगल गीतों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आवास में प्रवेश किया। उन्हें मांगल तिलक लगाया। पहाड़ी परंपरा के अनुसार, ढोल-दमौ व रणसिंघा के बीच उन्होंने परिसर में बने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद सीएम ने गौशाला में गाय की पूजा की और पूरे भवन की परिक्रमा की। भवन के द्वार भाग की पूजा के बाद अंदर दाखिल हुए धामी ने अपनी मां के चरण छुए और उनका आशीर्वाद लिया।

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूजा-अर्चना के बाद आखिरकार सीएम आवास में गृह प्रवेश कर ही लिया। इससे पहले नौ ब्राह्मणों ने छह दिन तक पूजा-अर्चना और यज्ञ पाठ किया। ज्योतिषियों और वास्तु शास्त्रियों के सुझावों पर वास्तु के अनुसार भवन में बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई है।

वहीं, कुछ हिस्सों में अभी भी मरम्मत का काम चल रहा है। वास्तु के अनुसार आवास की खिड़कियों, कमरों, बैठक, भोजनालय, चूल्हे, पानी की स्थिति में बदलाव किया गया है। वहीं, अभी भी कई कोणों को बदलने का काम जारी है। 

सोमवार को आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी ने पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके परिवार को गृह प्रवेश करवाया। मुख्यमंत्री आवास को लेकर यह धारणा है कि जो भी मुख्यमंत्री यहां रहा, वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। सबसे पहले यहां रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की असमय विदाई हुई। विजय बहुगुणा को भी आधे में अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। बंगले को लेकर धारणा इतनी गहरी है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने पूरे कार्यकाल में वहां रहने का साहस नहीं जुटा सके। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत करीब चार साल के अपने कार्यकाल में उसी आवास में रहे, वो भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उनके बाद मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत उस आवास से दूर ही रहे। हालांकि उसके बावजूद उनकी असमय विदाई हो गई। अब पुष्कर सिंह धामी ने उस आवास में रहने की हिम्मत तो दिखाई है, लेकिन उससे पहले कई दिनों तक तमाम वास्तु दोषों को दूर किया गया है। आचार्य डॉ. संतोष खंडूड़ी ने बताया कि 21 से 26 जुलाई तक नौ ब्राह्मणों ने आवास में विधिवत वास्तु स्थापना, वास्तु पूजन, देवी देवताओं का आह्वान, महाविद्या, रुद्री, गायत्री, चंडी, दुर्गा सप्तशती का पाठ कर स्थान को जागृत और सिद्ध किया। इसके अलावा वास्तु के अनुसार भवन में बड़े पैमाने पर बदलाव भी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बेडरूम की खिड़कियां दक्षिण दिशा में खुल रही थीं, जिन्हें बंद कर दिया गया है।
उनकी जगह पर वुड की वॉल पेनलिंग की गई है। अब खिड़कियां केवल नॉर्थ ईस्ट में हैं। इसके अलावा दक्षिण दिशा में बने किचन का वास्तुदोष भी दूर किया गया है। चूल्हे को आग्नेय कोण और जल को उत्तर दिशा में रखा जा रहा है। वास्तु के अनुसार आग और पानी एक साथ नहीं होने चाहिए। जिस घर में ऐसा होता है, वहां ऊर्जा समाप्त होने लगती है। इसके अलावा मुख्यद्वार और उससे लगी खिड़कियों की स्थिति को भी बदला गया है, अब वह सभी उत्तर-पूर्व की ओर खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भवन के पिछले दक्षिण में आंगन झुका हुआ है, जो वास्तु के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। यह दोष भवन में रहने वालों को भय और अस्थिरता प्रदान करता है। इसलिए उस हिस्से में मिट्टी भरकर उसे उठाया जा रहा है। उसके बाद आंगन को समतल किया जाएगा। समस्त दोषों के निराकरण के लिए छह दिनों तक चले विशेष मंत्रोच्चारण और यज्ञ में सीएम ने पूर्णाहूति दी। सोमवार को मुख्यमंत्री धामी ने मांगल गीतों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आवास में प्रवेश किया। उन्हें मांगल तिलक लगाया। पहाड़ी परंपरा के अनुसार, ढोल-दमौ व रणसिंघा के बीच उन्होंने परिसर में बने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद सीएम ने गौशाला में गाय की पूजा की और पूरे भवन की परिक्रमा की। भवन के द्वार भाग की पूजा के बाद अंदर दाखिल हुए धामी ने अपनी मां के चरण छुए और उनका आशीर्वाद लिया।

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