उत्तराखंड : राज्य में भू-कानून पहाड़ के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए जरूरी –  गायक “जुबिन नौटियाल”

गायकी से युवाओं का दिल जीतने वाले देहरादून निवासी सुप्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल ने उत्तराखंड में भू- कानून को लेकर चल रही मुहिम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि विभिन्न प्रांतों के लोगों का रुझान पहाड़ की ओर बढ़ा है। ऐसे में जरूरी है कि उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों में ऐसा भू-कानून बनाया जाए, जो पहाड़ के लोगों के हितों की रक्षा करता हो। जुबिन ने कहा कि नैनीताल और मसूरी देशभर के पर्यटकों की पसंदीदा जगह है।

हर साल बड़ी संख्या में यहां सैलानी आते हैं। कहा कि कोरोना संक्रमण फैलने के बाद लोग समुद्री तटों को छोड़कर पहाड़ों की तरफ न केवल घूमने आ रहे हैं, बल्कि पहाड़ की वादियों में बसना भी चाह रहे हैं।
पुराने दौर के गीतों को वापस लाने के लिए प्रयासरत
जुबिन नौटियाल ने कहा कि पहाड़ में जमीन की खरीद-फरोख्त पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार ऐसा भू कानून तैयार करे, जिससे पहाड़ के लोगों के हितों की रक्षा हो सके और जल, जंगल-जमीन पर उनका अधिकार बना रहे।

बातचीत के दौरान जुबिन ने कारगिल युद्ध के हीरो रहे शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘शेरशाह’ में गाए अपने गीत ‘काटूं कैसे राता ओ सांवरे, जिया नहीं जाता सुन बावरे, के रातां लंबेया लंबेया रे’ भी गुनगुनाया।

मौजूदा समय में फिल्मों में अर्थहीन गीतों को लेकर जुबिन का कहना था कि उनका कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो लोगों को अच्छा संदेश न देता हो। कहा कि वह पिछले कुछ साल से अरिजीत सिंह के साथ पुराने दौर के गीतों को वापस लाने के लिए प्रयासरत हैं।

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कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि हम इसके माध्यम से युवाओं को अच्छे कार्यों के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं। जीवन में तरक्की पाने के लिए कठोर मेहनत की जरूरत होती है। यदि व्यक्ति जीवन में अपनी मंजिल पाना चाहता है तो इसके लिए उसे खुद ही संघर्ष करना होगा।

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