उत्तराखंड / थराली, चमोली : नारायणबगड़ में दोनों बाजारों के बीच भूस्खलन क्षेत्र बना हुआ है सबके लिए जी का जंजाल। लगातार बारिश से सड़क हो रही गढ्ढों में तब्दील।

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चमोली जिले के पिण्डरघाटी में कर्णप्रयाग-ग्वालदम-बैजनाथ-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर नारायणबगड़ विकास खंड मुख्यालय के दोनों बाजारों के बीचों-बीच मुख्य सड़क वर्षों से भूस्खलन के कारण लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। पिछले दिनों हमने यह खबर प्रमुखता से दिखाई थी,तो बीआरओ ने यहां पर कुछ गड्ढे तो भरे किंतु लगातार हो रही बारिश और पिण्डर नदी का बढ़ता जल स्तर से इस जगह पर लगातार भू-धंसाव जारी है। जिससे कभी भी यहां पर बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना हुआ है।

बताते चलें कि नारायणबगड़ में दोनों बाजारों के बीचों-बीच लगभग 200 मीटर के करीब राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है।जो कि वर्षों से भूस्खलन की चपेट में है। पिछले महिने हुई अतिवृष्टि से यहां पर सड़क पर बड़ी बड़ी दरारें पड़ गई है और पुस्ते-दीवालें भी ध्वस्त हो गई हैं। जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले यातायात यहां से जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

पिण्डरघाटी की लाइफ लाइन कही जाने वाली यह सड़क सालों से इस जगह पर नीचे पिण्डर नदी के कटाव और ऊपर से भूस्खलन का दंश झेल रही है। ठीक इस जगह के ऊपर केवर गांव भी है जोकि इस भूस्खलन की जद में है।

सन् 2013 में आई बड़ी जल प्रपात की आपदा के समय यहां एक बड़ा बाजार और रिहायशी इमारतों आपदा की भेंट चढ़ कर जल प्रलय में समा गए थे।और इस भूस्खलन भाग में भी कई दुकानें और घर भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गए थे।तब उसके बाद सिंचाई विभाग ने पिण्डर नदी के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवाल तो बनाई परंतु इस बड़े भूस्खलन भाग को वैसे ही छोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों व व्यापारियों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने यह कहकर इस स्थान पर सुरक्षा दीवाल निर्माण नही किया कि इस स्थान पर कोई आबादी नहीं है।

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लोगों का यह भी कहना है कि इसके बाद लगातार शासन प्रशासन से इस जगह का ठीक से उपचार किए जाने की गुहार लगाई गई थी परंतु समस्या आज भी जब की तस बनी हुई है। मानसून अपने चरम पर है तो इस जगह पर सड़क मार्ग के हालात को देखकर मोटर वाहन चालकों और यात्रियों को हर समय डर सताता रहता है।और यही नहीं इस क्षेत्र में भूस्खलन बड़े स्तर पर हुआ तो दोनों तरफ के बाजारों की बहुत सारी दुकानों को भी यह अपने आगोश में समा ले जायेगा।यदि इस तरह की कोई अप्रिय स्थिति होंगी तो इसे शासन प्रशासन की भारी अनदेखी करने का खामियाजा ही कहा जायेगा।


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