अयोध्या धाम में भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद से देश के तमाम नेता, आईएएस ,आईपीएस अधिकारी अपने परिजनों के नाम जमीन खरीद के बड़े-बड़े सौदे कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामला महर्षि ट्रस्ट की जमीन को लेकर आया है। जिसमें आरोप है कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अयोध्या में 12 सौ एकड़ भूमि में नव्य अयोध्या का निर्माण करने जा रही है। वहां की जमीनों को सस्ते रेट में वहां तैनात अधिकारियों, पूर्व में तैनात अधिकारियों, आईएएस, आईपीएस , पीसीएस, पीसीएस अधिकारियों ने अयोध्या के जनप्रतिनिधियों ने बहुत ही सस्ते दाम पर अपने परिजनों के नाम जमीन खरीदी है। यह मामला जब सरकार के संज्ञान में आया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल इसकी जांच के आदेश दे दिए और राजस्व परिषद के सचिव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है 5 दिन में यह जांच रिपोर्ट सरकार को प्रदान की जाएगी। बताते चलें कि अयोध्या के माझा बरहटा मैं वर्तमान में अयोध्या के कमिश्नर एमपी अग्रवाल के ससुर केशव प्रसाद अग्रवाल ने 10 दिसंबर 2020 को महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से ₹31 लाख रुपये की 2530 वर्ग फीट जमीन खरीदी उनके बहनोई आनंद वर्धन ने भी उसी गांव में 15 लाख ₹50 हजार में 1260 वर्ग फीट जमीन खरीदी , वही अयोध्या के डीआईजी रह चुके दीपक कुमार की पत्नी की बहन महिमा ठाकुर ने 1 सितंबर 2021 को 1020 वर्ग मीटर जमीन 19 लाख ₹75 हजार में खरीदी, वही गोसाईगंज के विधायक रहे इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू ने भी 18 नवंबर 2019 को बर हटा माझा में 2593 वर्ग मीटर जमीन 30 लाख रुपए में खरीदी, उनके बहनोई राजेश मिश्रा ने राघवाचार्य के साथ मिलकर 16 मार्च 2021 को बरहटा माझा में 6320 वर्ग मीटर जमीन 47 लाख 40 हजार में खरीदी , अयोध्या के मुख्य मुख्य राजस्व अधिकारी रहे पुरुषोत्तम दास गुप्ता जो गोरखपुर में एडीएम है उनके साले अतुल गुप्ता की पत्नी तृप्ति गुप्ता ने अमरजीत यादव नाम के एक व्यक्ति के साथ साझेदारी में 12 अक्टूबर 2021 को बरहटा माझा में 1130 वर्ग मीटर जमीन 21लाख 88 हजार में खरीदी, अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के भतीजे तरुण मित्तल ने 21 नवंबर 2019 को बरहटा मांझा क्षेत्र में 5174 मीटर जमीन एक करोड़ 15 लाख रुपए में खरीदी, पूर्व आईएएस अधिकारी उमा धर द्विवेदी जो की सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्होंने भी माझा बरेटा में 23 अक्टूबर 2021 को ₹39 लाख की 1680 वर्ग मीटर जमीन खरीदी, अयोध्या नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने अयोध्या फैसले से 2 महीने पहले 18 सितंबर 2019 को हरीश कुमार से 30 लाख रूपए में 1480 वर्ग मीटर जमीन खरीदी, इसी तरीके अयोध्या जिला में डीएम रह चुके अनुज कुमार झा के खास रिश्तेदार भागलपुर निवासी संगम झा द्वारा माझा बरेटा में 11 नवंबर 2020 को जमीन खरीदी गई। माझा बरहटा वह क्षेत्र है जहां पर आवास विकास द्वारा 12 सौ एकड़ में नव्य अयोध्या बसाई जानी है। वहाँ जो भी जमीन हैं उसको सरकार खरीद कर अधिग्रहित कर रही है।यह योजना इन सभी अधिकारियों को पूर्व से मालूम थी। ऐसा आरोप है कि आवास विकास द्वारा ली जा रही जमीनों के बदले 4 गुना मुआवजा के लाभ के लिए इन अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदी है। दूसरा यह भी आरोप है कि महर्षि वेद विद्या पीठ ट्रस्ट द्वारा जिस जमीन का बैनामा इन अधिकारियों को किया गया है। उस जमीन को ट्रस्ट ने पहले हरिजन व्यक्ति से दान में ली और फिर इस जमीन को बेचने का कार्य किया है। सरकार इन सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है अयोध्या के संतो ने भी इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग किया है। तो वही जगतगुरु परमहंस आचार्य ने मांग किया है कि इसमें नेता, अधिकारी जो भी दोषी हो उनको सलाखों के पीछे भेजा जाए और उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जाए। संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने का स्वागत किया है।








