
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उतरे उन सभी प्रत्याशियों की सांसें अटक गई हैं, जिनके नाम पंचायतों और निकायों दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। ऐसा उच्च न्यायालय के एक जनहित याचिका पर आए उस आदेश से हुआ है, जिसमें दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वालों के मतदान करने और चुनाव लड़ने से संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति से जुड़े दिशा-निर्देशों पर रोक लगा दी गई है।
सत्तारूढ़ भाजपा अदालत के फैसले से कुछ ज्यादा सकते में है। पार्टी पंचायत चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभा रही है और उसने जिला पंचायत 358 में से 320 सीटों पर समर्थित प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। अभी पार्टी इन प्रत्याशियों के खिलाफ सुलग रही बगावत से भी नहीं उबर पाई थी कि अदालत के ताजा फैसले से नई दुविधा खड़ी हो गई है।
