ट्रम्प टैरिफ बनाम भारत: भारत और अमेरिका के कारोबारी रिश्तों में तनाव, दोनों देशों पर होगा असर

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भारत, अमेरिका का प्रमुख कारोबारी साझेदार है। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 130 अरब डॉलर का था। ऐसे में ट्रंप की घोषणा द्विपक्षीय व्यापार के लिए झटका है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने आशंका जताई कि नए टैरिफ से व्यापारिक विश्वास को क्षति पहुंचेगी और 2025-26 में कारोबार में 15 से 20 अरब डॉलर की कमी हो सकती है। अमेरिका ने पहले ही स्टील और एल्युमीनियम पर 50 प्रतिशत तथा ऑटो सेक्टर पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया हुआ है।

 

ट्रंप के टैरिफ का असर सबसे ज्यादा इन क्षेत्रों पर
भारत के जो क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे, उनमें रत्न-आभूषण, दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल व कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र उद्योग हैं। इन क्षेत्रों के लिए अमेरिका बड़ा बाजार है।

 

इन पर असर नहीं
आईटी सेवाएं, एफएमसीजी, दूरसंचार, रियल एस्टेट, बैंक व बिजली क्षेत्र पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

आईटी कंपनियों को भी राहत
अमेरिका से व्यापार में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी बहुत कम है। भारत की आईटी कंपनियां अमेरिका में व्यापार करती हैं, लेकिन वह सेवा श्रेणी में आता है, जो टैरिफ से बाहर है।

एशियाई देशों की तुलना में टैरिफ अधिक
ट्रंप ने दो अप्रैल को भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में 90 दिन के लिए रोक दिया था। अब 25 फीसदी टैरिफ चीन को छोड़कर एशिया के अन्य देशों की तुलना में अधिक है। ट्रंप ने इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और जापान पर 20 फीसदी या उससे कम टैरिफ लगाया है। चीन के साथ अमेरिका के टैरिफ टकराव के बीच एपल समेत कुछ बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने अपना उत्पादन भारत में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया था। अगर यह टैरिफ बना रहता है, तो भारत को नुकसान होगा।

ट्रंप के बदले सुर
इस बीच एक अगस्त से भारत से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 25 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा के चंद घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से पूछे गए एक सवाल पर कि क्या वह टैरिफ पर भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं? ट्रंप ने कहा, ‘हम अभी उनसे बात कर रहे हैं। हम देखेंगे कि क्या होता है? भारत दुनिया में सबसे अधिक या लगभग सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाला देश था। हम देखेंगे। हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं।’

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