
अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर का गिरोह संगठित रूप से कार्य कर रहा था। पारिवारिक समस्या हो या फिर गरीबी से परेशान लोगों को तलाशने के साथ ही छांगुर के फंड को खपाने की रणनीति भी तैयार होती थी।
चंदा जुटाने व उसे विदेश भेजने के लिए बाकायदा ट्रस्ट और संस्थाएं तैयार की गईं थीं। छांगुर ने आस्वी इंटरप्राइजेज, आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन, बाबा ताजुद्दीन आस्वी बुटीक जैसी संस्थाओं को कागजों में तैयार किया।
