
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर गए भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के कैप्सूल में बैठकर पृथ्वी पर लौट आए हैं। दोपहर करीब 3 बजे उन्हें और उनके तीन अन्य साथियों को लेकर कैप्सूल पृथ्वी पर उतरा। हालांकि, न तो शुभांशु की आईएसएस से लौटने की यात्रा बहुत आसान रहने वाली है और न ही पृथ्वी पर उतरने के बाद भी उन्हें यहां के वातावरण से बहुत सहूलियत मिलने वाली है।
रिपोर्ट्स की मानें तो हो सकता है कि शुभांशु और उनके साथियों को कैलिफोर्निया के पास प्रशांत महासागर में ड्रैगन कैप्सूल से निकालने के बाद स्ट्रेचर पर बिठाकर गंतव्य पर वापस ले जाया जाएगा। इस दौरान एक्सिओम-4 मिशन क्रू को सिर्फ चलने में ही नहीं देखने तक में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर शुभांशु शुक्ला के पृथ्वी पर लौटने के बाद क्या-क्या होगा? उन्हें और उनके साथियों को प्रशांत महासागर में गिरे कैप्सूल से कैसे निकाला जाएगा? इसके अलावा उन्हें कहां और कैसे ले जाया जाएगा? अगले कुछ दिनों तक नासा उन्हें किस तरह परखेगा? शुभांशु और उनके साथियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है? इसके अलावा उनकी भारत वापसी कब तक संभव होगी?
नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री और वर्तमान मिशन डायरेक्टर डॉ. रॉबर्ट कैबाना कहते हैं, पृथ्वी पर लौटना एक नियंत्रित दुर्घटना की तरह है। हर मिशन का आखिरी 10 मिनट ही सबसे कठिन होता है। अंतरिक्ष में जाना जितना कठिन है, लौटना उससे भी अधिक जोखिमपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। लेकिन वर्षों की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, परीक्षणों और आपातकालीन योजना ने इस प्रक्रिया को आज एक रूटीन ऑपरेशन बना दिया है फिर भी हर वापसी एक नया परीक्षण होती है।
