
मंदिर में चल रहे पाच दिवसीय महोत्सव का हुआ भव्य समापन, अतिथियों का स्वागत किया उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास ने
रामनगरी में प्रतिवाद भयंकर के नाम से मशहूर रहे राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस की रविवार को 22वीं पुण्यतिथि है। राम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रही दिगंबर अखाड़ा में आज उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान अयोध्या ही नहीं आसपास के जिलों के भी साधु संत मौजूद रहे और नम आंखों से राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय रामचंद्र दास को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ अयोध्या के वरिष्ठ साधु संतों ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर के कभी किसी से न डरने वाले प्रतिवाद भयंकर जिसे वाद विवाद में कभी कोई नहीं जीत सकता था, जो शंकराचार्य से भी राम मंदिर आंदोलन पर खुलकर चर्चा करते थे और प्रधानमंत्री से भी आंख में आंख डाल करके राम जन्मभूमि के मुक्ति की बात करते थे। ऐसे थे प्रतिवाद भयंकर स्वर्गीय रामचंद्र दास परमहंस। चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय रामचंद्र परमहंस की आज पुण्यतिथि है, जिन्हें आज हमने श्रद्धांजलि अर्पित की है। रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के साथ जानवरों से उनका विशेष लगाव था। फक्कड़ स्वभाव के कारण उन्हें परमहंस की उपाधि दी गई थी। प्रतिवाद भयंकर और परमहंस यह दोनों उपाधि उनके लिए एकदम परफेक्ट थी। हमेशा जानवरों के प्रति उनका लगाव था। बंदरों के भोजन की व्यवस्था वह प्रतिदिन करते थे। इसके साथ ही वह कभी दूध और फल का सेवन न करके केवल चाय का ही सेवन करते थे। इन तमाम विषयों पर बहुत गंभीरता से चंपत राय ने रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए मीडिया से बातचीत की।
कैसरगंज के लोकप्रिय नेता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने परमहंस के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों और उनके अदम्य साहस को याद किया।
उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास ने अपने दादा गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूज्य स्वर्गीय परमहंस राम मंदिर के लिए जीते थे। राम मंदिर के लिए उन्होंने आंदोलन शुरू किया और आंदोलन को ऐसी धार दे गए, जिसे कोई भूला नहीं सकता है।मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामलखन दास ने कहा कि जब-जब आंदोलन में निराशा छाई, तब-तब परमहंस जी की वाणी ने आशा का संचार किया।
परमहंस जी का सानिध्य प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी राजेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि अगर वो न होते तो मंदिर आंदोलन जन-जन का आंदोलन नहीं बन पाता। वे अकेले खड़े होकर हजारों को प्रेरित कर देते थे। महंत रामलखन दास व व्यवस्थापक आशुतोष सिंह ने संत-धर्माचार्यों का अभिनंदन किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत रामशरण दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत डॉ. भरत दास, महंत विवेक आचारी, जगद्गुरु डॉ. राघवाचार्य, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत रामकुमार दास, कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय,नीलेश सिंह, महेंद्र त्रिपाठी सहित, वृंदावन, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित अन्य कई प्रांतों से संत-धर्माचार्य व भक्त शामिल रहे।
