
उत्तराखंड को यू ही वीरों की भूमि नहीं कहा जाता। कारगिल युद्ध में राज्य के 75 वीर जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी शहादत दी थी। अब बलिदानियों की दूसरी पीढ़ी भी सेना में जाकर देश की सेवा कर रही है।
देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए देवभूमि के वीर सपूत हमेशा ही आगे रहे हैं। यही वजह है कि पति की शहादत के बाद वीरांगनाओं ने अपने बेटे को भी फौजी बना दिया। कोटद्वार पौड़ी निवासी वीरांगना टीना देवी बताती हैं कि उनके पति हवलदार मदन सिंह 17 गढ़वाल रेजीमेंट में थे।
