
प्राधिकरण, प्रशासन और नगर निगम की टीम ने काठगोदाम क्षेत्र में अवैध रूप से बनाई आठ दुकानों पर मंगलवार को जेसीबी चलवा दी। निगम के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण के दौरान हुई तोड़फोड़ के मरम्मत की आड़ में आठ व्यापारियों ने नक्शा स्वीकृत कराए बगैर ही दुकानों का विस्तार कर दिया था। कई लोगों ने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के भवनों को बहुमंजिला बना दिया था। अवैध निर्माण तोड़ने के दौरान व्यापारियों ने हंगामा भी किया लेकिन अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनीं।
पिछले दिनों जिला प्रशासन के निर्देश पर नैनीताल रोड को चौड़ा करने के लिए सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण हटाया गया था। प्रशासन ने तोड़े गए हिस्से की मरम्मत की अनुमति सभी को दी थी। कुछ कारोबारियों ने मरम्मत की आड़ में दुकानों में अवैध निर्माण कर लिया। काठगोदाम में भी आठ दुकानदारों ने अवैध निर्माण किया था। इनमें पांच नगर निगम और तीन निजी दुकानें शामिल थीं जिन्हें मंगलवार को प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों ने तुड़वा दिया। इस दौरान प्राधिकरण सचिव विजय नाथ शुक्ल, नगर आयुक्त ऋचा सिंह, प्राधिकरण के संयुक्त सचिव और सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
भाजपाइयों की अफसरों से हुई तीखी नोकझोंक
अवैध दुकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का भाजपा नेता सचिन साह और काठगोदाम मंडल अध्यक्ष नीरज बिष्ट समेत क्षेत्र के व्यापारियों ने विरोध किया। इस दौरान भाजपा नेताओं की अधिकारियों से तीखी झड़प भी हुई। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान ही प्रशासन ने उन्हें दुकान बनाने की अनुमति दी थी। आरोप लगाया कि पहले अनुमति दी और जब दुकानदारों ने दुकानें बना ली तो प्राधिकरण उन्हें अवैध करार देकर तोड़फोड़ की कार्रवाई कर रहा है।
सड़क चौड़ीकरण में दुकानें ध्वस्त हुई थीं, इसलिए इन दुकानदारों को केवल मरम्मत की छूट दी थी। मरम्मत की आड़ में दुकानदारों ने अवैध निर्माण किया है। किसी ने भी नक्शा स्वीकृत कराने अथवा अनुमति लेने की जहमत नहीं उठाई है। यह निर्माण कार्य पूरी तरह अवैध हैं। इस कारण इनका ध्वस्तीकरण किया है।
-विजय नाथ शुक्ल, सचिव, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण नैनीताल
नगर निगम की दुकानों के किरायेदारों को वर्ष 2016 में प्रथम तल में निर्माण की अनुमति दी गई थी। शर्त रखी गई थी कि वह नक्शा स्वीकृत होने के छह माह के भीतर अनिवार्य रूप से निर्माण करा लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दुकानदारों ने अब बगैर अनुमति निर्माण करा लिया। इसके लिए नगर निगम से अनुमति लेनी चाहिए थी। बगैर अनुमत्ति निर्माण कार्य अवैध है। -ऋचा सिंह, नगर आयुक्त हल्द्वानी
