
अब अस्थायी मंदिर का इतिहास भी जान सकेंगे श्रद्धालु। रामलला के दिव्य दर्शन को आने वाले श्रद्धालु अब न केवल भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर का वैभव देख सकेंगे बल्कि वे उस संघर्ष और साधना के कालखंड से भी होंगे रूबरू, जब प्रभु श्री रामलला टेंट में थे विराजमान। रामलला के अस्थाई मंदिर का इतिहास अब स्थाई रूप से किया जाएगा अंकित। अस्थाई मंदिर को एक धार्मिक स्मृति स्थल के रूप में संरक्षित करने की योजना पर हो रहा है काम। अस्थाई मंदिर परिसर में बनाई जाएगी एक विशेष दीर्घा। जिसमें चित्रों,अभिलेखो एवं डिजिटल माध्यमों से बताया जाएगा कि कैसे विषम परिस्थितियों में रामलला टेंट में विराजे रहे, फिर कैसे अस्थाई मंदिर में नित्य आरती पूजन और दर्शन की परंपरा चली। यहां पुजारियों, सेवको और सुरक्षा बलों के योगदान को भी किया जाएगा रेखांकित। टीकवुड यानी सागौन की लकड़ियों से किया जाएगा अस्थाई मंदिर का निर्माण। महाराष्ट्र और अन्य प्रांतों से आएंगी लकड़ियां। अस्थाई मंदिर निर्माण के लिए अभी नींव खुदाई का चल रहा है कार्य।
