
अयोध्या का प्रसिद्ध मणिपर्वत झूला मेला आज से शुरू हो गया है। आज शाम को प्रसिद्ध पीठ कनक भवन, श्री दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान व हनुमत निवास सहित एक हजार मंदिरों में झूला उत्सव मनाया जाएगा। अधिकांश मंदिरों में भगवान के अचल विग्रह झूलन पर विराजमान हो गए हैं। जबकि चल अर्थात उत्सव विग्रह को धूमधाम से रथ पर मणिपर्वत ले जाया जाएगा। वहां पेड़ की डाल में झूला डाल कर भगवान को सावन का पहला झूला झुलाया जाएगा।
मणिपर्वत पर झूले पर विराजमान भगवान के विग्रह और स्वरूपों के सामने गायन-वादन और नृत्य करके संत भगवान को प्रसन्न करेंगे। यह रमणीय स्थान सीता जी को बेहद प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि आज भी सावन में सीता जी श्रीराम के साथ यहां झूला झूलती हैं। भगवान की इस झांकी का दर्शन भक्तों के सभी मनोरथों को पूरा करने वाला बताया जाता है।
मान्यता है कि राजा जनक द्वारा नेग में दी गई अशर्फी के ढेर को रखने से यह स्थान पर्वत जैसा होकर मणिपर्वत के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां अत्यन्त प्राचीन मंदिर भी है जिसका कड़ी सुरक्षा के बीच आज लाखों भक्त दर्शन कर रहे हैं। मेला क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन के सारे अधिकारी डटे हुए हैं। यात्रा मार्ग की सुरक्षा में पुलिस के साथ पीएसी भी लगाई गई। शोभायात्रा चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी का राजमहल के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य व मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरू अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी श्री महान्त कृपालु रामभूषण देवाचार्य जी महाराज के संयोजन में निकली। हनुमत निवास से रथ पर सवार युगल सरकार के साथ आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के किलाधीश महंत मैथली रमण शरण व हनुमत निवास के महंत मिथलेश नन्दनी शरण अपने शिष्य परिकरों के साथ शोभायात्रा सहित मणिपर्वत पर युगल सरकार को झूला झुलाया। इसके बाद से ही अयोध्या के मठ मंदिरों में झूलनोत्सव का आगाज हो गया। तो वही नगरी के बड़ा भक्त माल आश्रम में झूले पर विराजमान स्वरूप सरकार को झूला झुला रहें संत साधक। मंदिर में करीब एक दर्जन सखियां कजरी गीत गायन करके नृत्य कर रही है। मंदिर में अध्यात्म, गीत व संगीत की त्रिवेणी बह रही है। झूलनोत्सव को बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास महाराज अपनी अध्यक्षता प्रदान कर रहें देखरेख कृष्णा दास कर रहें।
